Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi | सरदार वल्लभभाई पटेल जीवनी

Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi | सरदार वल्लभभाई पटेल जीवनी

सरदार वल्लभ भाई पटेल जिन्हें भारत का  भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष भी कहा जाता है। जो की भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे  थे और भारत की आजादी के बाद वे देश के प्रथम गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री भी रहे । बारडोली सत्याग्रह ( वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ यह एक प्रमुख किसान आंदोलन था ) में अपने अमूल्य योगदान के लिए लोगों ने उन्हें सरदार की उपाधि प्रदान की थी ।  सरदार पटेल एक प्रसिद्ध वकील भी थे लेकिन उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत को आजादी दिलाने में लगा दिया ।

Sardar Vallabhbhai Patel

Name/नाम सरदार वल्लभभाई पटेल / Vallabhbhai Jhaverbhai Patel
Born/जन्म 31 अक्टूबर, 1875  नडियाद, गुजरात
Died / मृत्यु 15 दिसम्बर 1950 (उम्र 75) महाराष्ट्र
माता /  पिता  झवेरभाई पटेल एवं लाडबा देवी
Nationality/नागरिकता भारतीय
Field/क्षेत्र /प्रसिद्धि कारण वकालत, राजनीति,स्वतंत्रता सेनानी
 Achievement/उपलब्धि  भारत के प्रथम गृहमंत्री ,प्रथम उपप्रधानमंत्री
External links/बाहरी लिंक  wikipedia

आरंभिक जीवन / Biography of  Vallabhbhai Patel:

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म लेवा पाटीदार जाति के एक समृद्ध जमीदार परिवार में  31 अक्टूबर 1875 को अपने ननिहाल करमसद गांव जो कि गुजरात में हुआ था । वे अपने माता-पिता की चौथी संतान थे । उनसे बड़े सोमाभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई थे। इनमें विट्ठलभाई तथा वल्लभभाई ने राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेकर भारतीय इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। उनकी एक बहिन भी जिसका नाम डाबीहा था और वो सबसे छोटी थी। उनके पिता झवेरभाई पटेल एक साधारण किसान और माता लाडबा देवी एक गृहिणी थी। बचपन से ही वह परिश्रमी और मेहनती प्रवर्ती के थे और अपने पिता को खेती में हाथ बंटाया  करते थे ।

पारंपरिक हिंदू माहौल में पले-बड़े सरदार पटेल ने करमसद में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की परंतु उन्होंने अपना अधिकांश ज्ञान स्वाध्याय से ही प्राप्त किया । मात्र 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया और 22 वर्ष की उम्र में उन्होंने मैट्रिक्स की परीक्षा पास कर ली और उसके बाद जिला अधिवक्ता की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए जिसे उन्हें वकालत करने की अनुमति मिल गई । माता-पिता के गुण संयम, साहस, सहिष्णुता, देश-प्रेम का प्रभाव वल्लभभाई के चरित्र पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है ।

लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर  (Barristers ) की पढाई की और अपनी पढाई पूर्ण कर वे वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया और अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया ।

स्वतन्त्रता आन्दोलन में योगदान :

स्वतन्त्रता आन्दोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला योगदान खेडा संघर्ष  (Kheda Satyagraha of 1918) में हुआ। गुजरात का खेडा जिले में उन दिनो भयंकर सूखे की चपेट में था। किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी कर में छूट की मांग की। जब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, महात्मा गांधी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर न देने के लिये प्रेरित किया। अन्त में सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी। इस सत्याग्रह के फलस्वरूप गुजरात के जनजीवन में एक नया तेज और उत्साह उत्पन्न हुआ और आत्मविश्वास जागा। यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी।

बारदोली सत्याग्रह ( Bardoli Satyagraha of 1928) “भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन” का सबसे संगठित, व्यापक एवं सफल आन्दोलन रहा है। वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ यह एक प्रमुख किसान आंदोलन था जिसका नेतृत्व वल्लभ भाई पटेल ने किया था। उस समय प्रांतीय सरकार ने किसानों के लगान में 30% तक की वृद्धि कर दी थी। पटेल ने इस लगान वृद्धि का जमकर विरोध किया। सरकार ने इस सत्याग्रह आंदोलन को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाए, पर अंतत: विवश होकर उसे किसानों की मांगों को मानना पड़ा। एक न्यायिक अधिकारी बूमफील्ड और एक राजस्व अधिकारी मैक्सवेल ने संपूर्ण मामलों की जांच कर 22% लगान वृद्धि को गलत ठहराते हुए इसे घटाकर 6.03% कर दिया। महिलाओं ने भी इस आन्दोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें बम्बई की पारसी महिला मीठूबेन पेंटिट, भक्तिवा, मनीबेन पटेल, सुपुत्री शारदाबेन शाह और शादराशाह के नाम उल्लेखनीय हैं। इस सत्याग्रह आंदोलन के सफल होने के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभभाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की।

आजादी के बाद:

यद्यपि आजादी के बाद वे देश के प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार थे और अधिकांश प्रान्तीय कांग्रेस समितियाँ एवं देश की जनता  उनके पक्ष में थी , परन्तु अंग्रेजो की कूटनीति एवं  गांधीजी की इच्छा के कारण देशवासियों का ये सपना पूरा न हो सका और पटेल ने अपने आप को  प्रधानमंत्री पद की दौड से दूर रखा और इसके लिये जवाहर लाल नेहरू का समर्थन किया। उन्हे उपप्रधान मंत्री एवं गृह मंत्री का पदभार सौंपा गया। 

गृह मंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देसी रियासतों (राज्यों) को भारत में मिलाना था।  भारतीय स्वतंत्रता एक्ट 1947 के तहत पटेल देश के सभी राज्यों की स्थिति को आर्थिक और दर्शनिक रूप से मजबूत बनाना चाहते थे। भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान के लिये उन्हे “आयरन मैन ऑफ़ इंडिया – भारत का लौह पुरूष के रूप में जाना जाता है। सन 1950 में उनका देहान्त हो गया। इसके बाद नेहरू का कांग्रेस के अन्दर बहुत कम विरोध शेष रहा।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद स्वयं को स्वतंत्र मान लेने वाली 562 रियासतों का एकीकरण करके सरदार बल्लभाई पटेल ने जो उपलब्धि हासिल की थी वह वैश्विक इतिहास में ऐसी अद्वितीय घटना है जिसके समक्ष बिस्मार्क भी बौने साबित होंगे.

सरदार पटेल ने राष्ट्रिय एकता के एक जीते जागते उद्हारण थे । पटेल के कथन थे की  “मैंने कला या विज्ञान के विशाल गगन में ऊंची उड़ानें नहीं भरीं। मेरा विकास कच्ची झोपड़ियों में गरीब किसान के खेतों की भूमि और शहरों के गंदे मकानों में हुआ है।” वहीं उनके विपरीत नेहरू को गांव की गंदगी, तथा ग्रामीण रहन-सहन ढंग से चिढ़ थी।

उनके इन्ही कार्यो के कारण आज उनके जन्मदिन को राष्ट्रिय स्मृति दिवस को राष्ट्रिय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस दिन को भारत सरकार ने  वर्ष 2014 से मनाना शुरू किया था, हर साल “31 अक्टूबर को राष्ट्रिय एकता दिवस  “मनाया जाता है।

 

प्रमुख सम्मान :

  • अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नामकरण सरदार वल्लभभाई पटेल अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है।
  • गुजरात के वल्लभ विद्यानगर में सरदार पटेल विश्वविद्यालय ।
  • 1991 में मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया ।

 

विशेषता –

  • सरदार
  • भारत का लौह पुरूष
  • भारत के 562 रियासतों के एकीकरण के थोर शिल्पकार
  • स्वतंत्र भारत के पहले उपप्रधान मंत्रीऔर गृहमंत्री

ये भी पढ़े : अन्ना हजारे की जीवनी

 

Most popular keywords Related Tags: सरदार वल्लभभाई पटेल की जाति, सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय, जीवनी सरदार वल्लभभाई पटेल, सरदार वल्लभभाई पटेल पुरस्कार, सरदार वल्लभभाई पटेल का आंदोलन, सरदार पटेल का पूरा नाम, सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रेरणादायी जीवनी,सरदार वल्लभभाई पटेल पर निबंध,सरदार वल्लभ भाई पटेल के विचार, सरदार पटेल की जाति, सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी, सरदार पटेल के नारे, सरदार पटेल का योगदान, सरदार पटेल के प्रेरक प्रसंग, सरदार पटेल के विचार, सरदार पटेल पर कविता,sardar vallabhbhai patel essay, sardar vallabhbhai patel statue, sardar vallabhbhai patel books, sardar vallabhbhai patel quotes, sardar vallabhbhai patel in gujarati, sardar vallabhbhai patel in hindi, sardar vallabhbhai patel poem, sardar vallabhbhai patel achievements, Article On Sardar Vallabhbhai Patel, Sardar Vallabhbhai Patel Biography In Hindi, Biography of  Vallabhbhai Patel, 31 october in india and world history in hindi,31 अक्टूबर 2017, 31st October,31 October in History ,History of India,indian history

2 Comments on “Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi | सरदार वल्लभभाई पटेल जीवनी”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *