Anasuya Sarabhai Biography in Hindi | अनसूया साराभाई

Anasuya Sarabhai Biography in Hindi gyanidunia

दोस्तों जैसा कि आप सभी को पता है Google अपने डूडल के जरिए दुनिया के महान प्रतिभाशाली हस्तियों को याद करता है आज (11 november 2017) अपनी इसी कड़ी में  गूगल ने सामाजिक कार्यकर्ता अनुसूया साराभाई के 132 वें जन्मदिन पर उनको अपना डूडल समर्पित किया है तो आइये जानते है की कौन थी Anasuya Sarabhai (Who is Anasuya Sarabhai ?).

Google celebrated Anasuya Sarabhai’s 132nd birthday with a Google Doodle, visible to users in India.

गूगल डूगल में आज अनसूया साराभाई, जानें कौन थीं

अनुसुइया साराभाई एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता थी ,साराभाई (1995-1972) भारत में स्त्री श्रम आन्दोलन की अग्रदूत थीं। Anasuya Sarabhai Biography in Hindi gyaniduniaउन्हें बुनकरों और टेक्सटाइल उद्योग में मजदूरों की लड़ाई लड़ने के लिए भी जाना जाता है। इन्हें  मोटाबेन यानि बड़ी बहिन कहकर भी पुकारा जाता है। उन्होने 1920 में अहमदाबाद में मजदूर महाजन संघ की स्थापना की जो भारत के टेक्सटाइल श्रमिकों के सबसे पुराना संघ है । उन्होंने  महिलाओं  को समानता और न्याय दिलाने के जीवन भर अथक प्रयत्न किये।

जन्म ,प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अनुसुइया साराभाई का जन्म अहमदाबाद में 11 नवंबर 1885 एक संपन्न  उद्योगपति परिवार में हुआ था । मात्र 9 वर्ष की उम्र में  उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी । जिसके बाद उन्हें उनके छोटे भाई अंबलाल साराभाई और एक छोटी बहन को चाचा के साथ रहने के लिए भेज दिया । मात्र 13 वर्ष की कच्ची में उनकी शादी हो गई थी । उनका वैवाहिक जीवन अल्पकालिक और दुःखद रहा ।

अपने भाई की मदद से वह 1912 में मेडिकल की डिग्री लेने के लिए इंग्लैंड चली गईं परन्तु उन्होंने इसे पूरा नही किया क्योकि  मेडिकल डिग्री प्राप्त करने के लिए उन्हें पशु विच्छेदन जैसे क्रिया-कलापों से गुजरना पड़गा जो की उन्हें उचिंत नही लगा और जैन धर्म के विपरीत भी था  , तो उन्होंने अपनी मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में प्रवेश ले लिया ।

Anasuya Sarabhai का राजनीतिक जीवन

1913 में वो भारत वापस लौट आई और महिलाओं और गरीबों की भलाई के लिए कार्य करने का निर्णय लिया । उन्होंने एक स्कूल भी खोला । जब उन्होंने 36 घंटे की पारी के बाद घर लौटने वाले महिला मिल कामगारों की दयनीय स्थिति को देखा तो उन्होंने मजदूर आंदोलन करने का फैसला लिया।

उन्होंने अहमदाबाद में 1914 की हड़ताल में कपड़ा कामगारों को संगठित करने में मदद की। वे 1917 में एक महीने की लंबी हड़ताल में भी शामिल थीं, जहां बुनकर मजदूरी में 50% की बढ़ोतरी मांग रहे थे और 20% की पेशकश की जा रही थी। परिवार के एक दोस्त के रूप में गांधीजी, तब तक साराभाई के गुरु के रूप में अभिनय कर रहे थे। गांधी जी ने श्रमिकों की ओर से भूख हड़ताल शुरू की और श्रमिकों ने अंततः 35% वृद्धि हासिल की। उनके इस महत्वपूर्ण  योगदान के लिए देश उन्हें हमेशा गर्व से याद करेगा । साराभाई का निधन 1972 में हुआ .

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