Anna Hazare Biography In Hindi | अन्ना हजारे की जीवनी

Anna Hazare Biography In Hindi

Kisan Baburao Hazare / किसन बाबूराव हजारे (जन्म : 15 June 1937 ) जो की  एक भारतीय समाजसेवी  के रूप में जाने जाते हैं। अधिकांश लोग उन्हें अन्ना हजारे के नाम से जानते हैं। सन् 1992 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सूचना के अधिकार (Right to Information Act, 2005) के लिये कार्य करने वालों में वे प्रमुख थे। जन लोकपाल विधेयक को पारित कराने के लिये अन्ना ने 16 अगस्त 2011 से आमरण अनशन आरम्भ किया था।

 Anna Hazare Biography In Hindi

Name/नाम किसन बाबूराव हजारे
Born/जन्म १५ जून १९३७ रालेगन सिद्धि, अहमदनगर, महाराष्ट्र
माता /  पिता लक्ष्मीबाई हजारे / बाबूराव हजारे
Nationality/नागरिकता  भारतीय
Field/क्षेत्र /प्रसिद्धि कारण भ्रष्टाचार विरोधी जन आन्दोलन
Achievement/उपलब्धि पद्म भूषण (1992), सीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ़ द इयर, Padma Shri in social work (1990)
External links/बाहरी लिंक  wikipedia

आरंभिक जीवन : 

Anna का बचपन बहुत गरीबी में गुजरा। पिता मजदूर थे तथा दादा भारतीय सेना में थे। वैसे अन्ना के पूर्वंजों का गाँव अहमद नगर जिले में ही स्थित रालेगन सिद्धि में था। दादा की मृत्यु के सात वर्षों बाद अन्ना का परिवार रालेगन आ गया। अन्ना के छह भाई हैं। परिवार में तंगी का आलम देखकर अन्ना की बुआ उन्हें मुम्बई ले गईं। वहाँ उन्होंने 7वीं तक पढ़ाई की। परिवार पर कष्टों का बोझ देखकर वे दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेचने वाले की दुकान में 40 रुपये के वेतन पर काम करने लगे। इसके बाद उन्होंने फूलों की अपनी खुद की  दुकान खोल ली और अपने दो भाइयों को भी रालेगन से बुला लिया । वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद सरकार की युवाओं से सेना में शामिल होने की अपील पर अन्ना 1963 में सेना की मराठा रेजीमेंट में ड्राइवर के रूप में भर्ती हो गए।  1964 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अन्ना हजारे खेमकरण सीमा पर नियुक्त थे। 12 नवम्बर 1965 को चौकी पर पाकिस्तानी हवाई बमबारी में वहाँ तैनात सारे सैनिक मारे गए। इस घटना ने अन्ना के जीवन को सदा के लिए बदल दिया।

युद्ध की समाप्ति के बाद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उन्होंने स्वामी विवेकानंद की एक पुस्तक ‘कॉल टु दि यूथ फॉर नेशन‘ खरीदी। इसे पढ़कर उनके मन में भी अपना जीवन समाज को समर्पित करने की इच्छा जाग्रत हो गई। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी और विनोबा भावे की पुस्तकें भी पढ़ीं। 1970 में उन्होंने आजीवन अविवाहित रहकर स्वयं को सामाजिक कार्यों के लिए पूर्णतः समर्पित कर देने का संकल्प कर लिया।

1975 में जम्मू में तैनाती के दौरान सेना में सेवा के 15 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली। वे अपने पुस्तेनी गाँव रालेगन सिद्धि में रहने लगे और इसी गाँव को उन्होंने अपनी सामाजिक कर्मस्थली बनाकर समाज सेवा में जुट गए।

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सामाजिक कार्य:

सेवा निवृत्ति के बाद अन्ना अपने गाँव रालेगन आ गये और अपने संकल्प के अनुसार सामाजिक कार्य प्रारंभ कर दिया। इस गाँव में बिजली और पानी कमी की बहुत ही भयंकर समस्या  थी। अन्ना ने गाँव वालों को नहर बनाने और गड्ढे खोदकर बारिश का पानी इकट्ठा करने के लिए प्रेरित किया और स्वयं भी भी इस कार्य में योगदान दिया। अन्ना के कहने पर गाँव में जगह-जगह पेड़ लगाए गए। गाँव में सौर ऊर्जा और गोबर गैस के जरिए बिजली की सप्लाई की गई। उन्होंने अपनी ज़मीन बच्चों के हॉस्टल के लिए दान कर दी और अपनी पेंशन का सारा पैसा गाँव के विकास कार्यो  के लिए समर्पित कर दिया। वे गाँव के मंदिर में रहने लगे  और हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए बनने वाला खाना ही खाते थे । आज उनकी बदौलत गाँव का हर शख्स आत्मनिर्भर है। आस-पड़ोस के गाँवों के लिए भी यहाँ से चारा, दूध आदि जाता है। यह गाँव आज शांति, सौहार्द्र एवं भाईचारे की मिसाल है।

सूचना का अधिकार ( RTI )आंदोलन 1997-2005

क्या है सूचना का अधिकार :सूचना का अधिकार अधिनियम भारत की संसद द्वारा पारित एक कानून है, जो 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ यह कानून भारत के  सभी नागरिकों को सरकारी फाइलों/रिकार्ड्स में दर्ज सूचना को देखने और उसे प्राप्त करने का अधिकार देता है. जम्मू एवं कश्मीर को छोड़ कर सम्पूर्ण  भारत में  यह अधिनियम लागू है.

जिसे सन 1997 में अन्ना हजारे ने सूचना का अधिकार अधिनियम ( RTI ) के  इस अभियान को शुरु किया। और  9 अगस्त 2003 को मुंबई के आजाद मैदान में ही अन्ना हजारे आमरण अनशन पर बैठ गए। 12 दिन तक चले इस अभियान आमरण अनशन के दौरान अन्ना हजारे और सूचना का अधिकार आंदोलन को पुरे देश का  समर्थन मिला। अंत 2003 में ही महाराष्ट्र सरकार को इस अधिनियम के एक मज़बूत और कड़े विधेयक को पारित करना पड़ा। बाद में इसी आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले लिया। इसके परिणामस्वरूप 12 अक्टूबर 2005 को भारतीय संसद ने भी सूचना का अधिकार अधिनियम पारित किया। अगस्त 2006, में सूचना का अधिकार अधिनियम में संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ अन्ना ने फिर से 11 दिन तक आमरण अनशन किया, और इस बार भी  देशभर में समर्थन मिला। जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने संशोधन का इरादा बदल दिया।

महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन 2003

2003 में अन्ना हजारे ने Congress और NCP सरकार के चार मंत्रियों-नवाब मलिक, विजय कुमार गावित ,सुरेश दादा जैन और पद्मसिंह पाटिल को भ्रष्ट मंत्री  बताकर उनके आन्दोलन छेड़ दिया और भूख हड़ताल पर बैठ गए। तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने इसके बाद एक जांच आयोग का गठन किया। नवाब मलिक ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। आयोग ने जब सुरेश जैन के ख़िलाफ़ आरोप तय किए तो उन्हें भी त्यागपत्र देना पड़ा ।

जन लोकपाल विधेयक आंदोलन:

नागरिक लोकपाल विधेयक( jan lokpal bill) के निर्माण के लिए जारी यह आंदोलन अपने अखिल भारतीय स्वरूप में 5  अप्रैल 2011 को समाजसेवी अन्ना हजारे एवं उनके साथियों ने  जंतर-मंतर पर शुरु किया गया जिसमे अन्ना हजारे ने अनशन के साथ इसका आरंभ हुआ, इस आन्दोलन में अन्ना के साथ मैग्सेसे पुरस्कार विजेता अरविंद केजरीवाल, भारत की पहली महिला प्रशासनिक अधिकारी (India’s first female IPS officer) किरण बेदी, प्रसिद्ध लोकधर्मी वकील प्रशांत भूषण, आदि प्रमुख रूप से शामिल थे। संचार साधनों के प्रभाव के कारण इस अनशन का प्रभाव समूचे भारत में फैल गया और इसके समर्थन में हजारों की सख्या में लोग सड़कों पर भी उतरने लगे। इन्होंने भारत सरकार से एक मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक बनाने की माँग की थी और अपनी माँग के अनुरूप सरकार को लोकपाल बिल का एक मसौदा भी दिया था। परन्तु  मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस  सरकार ने इसके प्रति नकारात्मक रवैया दिखाया और इसकी उपेक्षा की। इसके परिणामस्वरूप शुरु हुए अनशन के प्रति भी उनका रवैया उपेक्षा पूर्ण ही रहा। लेकिन इस अनशन ने जब सम्पूर्ण देश में  आंदोलन का रूप लेने पर भारत सरकार ने आनन-फानन में एक समिति बनाकर संभावित खतरे को टाला और 16 अगस्त तक संसद में लोकपाल विधेयक पारित कराने की बात स्वीकार कर ली।

अगस्त से शुरु हुए मानसून सत्र में सरकार ने जो विधेयक प्रस्तुत किया वह कमजोर और जन लोकपाल के सर्वथा विपरीत था। अन्ना हजारे ने इसके खिलाफ अपने पूर्व घोषित तिथि 16 अगस्त से पुनः अनशन पर जाने की बात दुहराई। सरकार ने  16 अगस्त को अन्ना हजारे एवं उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया। किंतु इससे आंदोलन पुरे देश में भड़क उठा। देश भर में अगले 12 दिनों  बड़ी संख्या में धरना प्रदर्शन और अनशन आयोजित किए गए। अंततः संसद द्वारा अन्ना की तीन शर्तों पर सहमती का प्रस्ताव पास करने के बाद 28 अगस्त को अन्ना ने अपना अनशन स्थगित करने की घोषणा की। उनकी तीन शर्ते थी कि तमाम सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाया जाए, तमाम सरकारी कार्यालयों में एक नागरिक चार्टर लगाया जाए और सभी राज्यों में लोकायुक्त हो।

अन्ना का व्यक्तित्व और विचारधारा:

गांधी की विरासत उनकी थाती है। कद-काठी में वे बहुत ही साधारण व्यक्ति हैं। सिर पर गांधी टोपी और शरीर पर खादी कपड़े उनका पहनावा है। आँखों पर मोटा चश्मा है पहनते है लेकिन उनको दूर तक साफ़ दिखता है। उनके इरादे फौलादी और अटल हैं। महात्मा गांधी के बाद अन्ना हजारे ने ही भूख हड़ताल और आमरण अनशन को सबसे ज्यादा बार बतौर हथियार के रूप में  इस्तेमाल किया है। इसके जरिए उन्होंने भ्रष्ट प्रशासन को पद छोड़ने एवं सरकारों को जनहितकारी कानून बनाने पर मजबूर किया है। अन्ना हजारे को आधुनिक युग का गान्धी भी कहा जा सकता है।

अन्ना हजारे गांधीजी के ग्राम स्वराज्य को भारत के गाँवों की समृद्धि का माध्यम मानते हैं। उनका मानना है कि ‘बलशाली भारत के लिए गाँवों को अपने पैरों पर खड़ा करना होगा।’ उनके अनुसार विकास का लाभ समान रूप से वितरित न हो पाने का कारण गाँवों को केन्द्र में न रखना रहा। व्यक्ति निर्माण से ग्राम निर्माण और तब स्वाभाविक ही देश निर्माण के गांधीजी के मन्त्र को उन्होंने हकीकत में उतार कर दिखाया और एक गाँव से आरम्भ उनका यह अभियान आज सैंकड़ो गाँवों तक सफलतापूर्वक जारी है। व्यक्ति निर्माण के लिए मूल मंत्र  देते हुए उन्होंने युवाओं में उत्तम चरित्र, शुद्ध आचार-विचार, निष्कलंक जीवन व त्याग की भावना विकसित करने व निर्भयता को आत्मसात कर आम आदमी की सेवा को आदर्श के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया है।

प्रमुख सम्मान :

  • पद्मभूषण पुरस्कार (1992)
  • पद्मश्री पुरस्कार (1990)
  • इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार (1976)
  • महाराष्ट्र सरकार का कृषि भूषण पुरस्कार (1989)
  • यंग इंडिया पुरस्कार
  • मैन ऑफ़ द ईयर अवार्ड (1988)
  • पॉल मित्तल नेशनल अवार्ड (2000)
  • ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंटेग्रीटि अवार्ड (2003)
  • विवेकानंद सेवा पुरुस्कार (1996)
  • शिरोमणि अवार्ड (1997)
  • महावीर पुरुस्कार (1997)
  • दिवालीबेन मेहता अवार्ड (1999)
  • केयर इन्टरनेशनल (1998)
  • बासवश्री प्रशस्ति (2000)
  • GIANTS INTERNATIONAL AWARD (2000)
  • नेशनलइंटरग्रेसन अवार्ड (1999)
  • विश्व-वात्सल्य एवं संतबल पुरस्कार
  • जनसेवा अवार्ड (1999)
  • रोटरी इन्टरनेशनल मनव सेवा पुरस्कार (1998)
  • विश्व बैंक का ‘जित गिल स्मारक पुरस्कार’ (2008)

प्रमुख आंदोलन:

  • महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन 1991
  • सूचना का अधिकार आंदोलन 1997-2005
  • महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन 2003
  • लोकपाल विधेयक आंदोलन 2011
Website: http://www.annahazare.org/

 

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