Information About Ganesh Chaturthi 2018 in Hindi

Information About Ganesh Chaturthi 2018 in Hindi

Information About Ganesh Chaturthi 2018 in Hindi Ganesh Chaturthi 2018 Wishes to  All Gyanidunia Readers | श्री गणेश चतुर्थी  की हार्दिक शुभकामनाएं   | Ganesh Chaturthi 13th Sep – 23rd Sept 2018. Ganesh Chaturthi is one of the major Religious Festivals of our Country India…Here is Ganesh Chaturthi information in hindi date and puja time and Muhurat.

Ganesh Chaturthi 2018 Date – Thursday, 13 September 2018 

Information About Ganesh Chaturthi 2018 in Hindi | श्री गणेश चतुर्थी सक्षिप्त में जानकारी

गणेश चतुर्थी  (Ganesh Chaturthi Festival) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार भारत के विभिन्न भागों में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को  बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है मुख्यतय महाराष्ट्र में इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। Vinayaka Chaturthi पर हिन्दू God Ganesh की पूजा की जाती है। कई प्रमुख जगहों पर Lord Ganesh  की बड़ी प्रतिमा (Pratima) स्थापित की जाती है।

गणेशोत्सव अर्थात गणेश चतुर्थी का उत्सव, १० दिन के बाद, अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है और यह दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। इस प्रतिमा का नो दिन तक विधिवत पूजन किया जाता है। बड़ी संख्या में आस पास के लोग दर्शन करने पहुँचते है। नो दिन बाद अनन्त चतुर्दशी के दिन गाजे बाजे से श्री गणेश जी महाराज की प्रतिमा को किसी तालाब इत्यादि जल में विसर्जित किया जाता है।

Ganesh Chaturthi 2018 Festivals Date and Shubh Muhurat in india

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गणेश चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त

  • गणेश चतुर्थी 13 सितंबर 2018, गुरुवार को है।
  • 23 सितंबर 2018, रविवार को अनंत चतुर्दशी है जिस दिन गणेश विसर्जन होगा।
  • मध्याह्न काल में गणेश पूजन का समय = 11:03 से 13:30 तक।

गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखना निषेद क्यों है?

पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखता है वह व्यक्ति मिथ्या दोशम या मिथ्या कलंक का शिकार हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण को भाद्रपदा शुक्ला चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने के लिए अनमोल गहना स्यमंताका की चोरी के झूठे आरोप को सहन करना पड़ा। भगवान नारद ने भगवान कृष्ण को बताया कि भगवान गणेश ने चंद्र (चंद्रमा) को शाप दिया था कि जो कोई भी इस दिन चंद्रमा को देखेगा वह मिथ्या दोषम के साथ शापित हो जाएगा और समाज में अपमानित होगा।

गणेश चतुर्थी चंद्र दर्शन टाइम

  • 12 सितंबर 2018, बुधवार को चांद नहीं देखने का समय = 16:07 से 20:33 बजे तक।
  • 13 सितंबर 2018, वीरवार को चांद नहीं देखने का समय = 09:31 से 21:12 बजे तक।
  • चतुर्थी तिथि आरंभ = 12 सितंबर 2018, बुधवार 16:07 बजे।
  • चतुर्थी तिथि समाप्त = 13 सितंबर 2018, गुरुवार 14:51 बजे।

गणेश चतुर्थी की कथा (Story of Ganesh Chaturthi)

एक बार भगवान शिव स्नान करने के लिए भोगावती गए। उनके जाने के पश्चात माता पार्वती ने अपने तन के मैल से एक पुतला बनाया और उसका नाम ‘गणेश‘ रखा। पार्वती ने उससे कहा- हे पुत्र! तुम एक मुगदल लेकर द्वार पर बैठ जाओ। मैं भीतर जाकर स्नान कर रही हूँ। जब तक मैं स्नान न कर लूं, तब तक तुम किसी भी पुरुष को भीतर मत आने देना।

भोगावती में स्नान करने के बाद जब भगवान शिवजी आए तो गणेशजी ने उन्हें द्वार पर रोक लिया। इसे शिवजी ने अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर उनका सिर धड़ से अलग करके भीतर चले गए। पार्वती ने उन्हें नाराज देखकर समझा कि भोजन में विलंब होने के कारण महादेवजी नाराज हैं। इसलिए उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर शिवजी को बुलाया।

तब दूसरा थाल देखकर तनिक आश्चर्यचकित होकर शिवजी ने पूछा- यह दूसरा थाल किसके लिए हैं? पार्वती जी बोलीं- पुत्र गणेश के लिए हैं, जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है।

यह सुनकर शिवजी और अधिक आश्चर्यचकित हुए। तुम्हारा पुत्र पहरा दे रहा है? हाँ नाथ! क्या आपने उसे देखा नहीं? देखा तो था, किन्तु मैंने तो अपने रोके जाने पर उसे कोई उद्दण्ड बालक समझकर उसका सिर काट दिया। यह सुनकर पार्वती जी बहुत दुःखी हुईं। वे विलाप करने लगीं। तब पार्वती जी को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर बालक के धड़ से जोड़ दिया। पार्वती जी इस प्रकार पुत्र गणेश को पाकर बहुत प्रसन्न हुई। उन्होंने पति तथा पुत्र को प्रीतिपूर्वक भोजन कराकर बाद में स्वयं भोजन किया।

यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुई थी। इसीलिए यह तिथि पुण्य पर्व के रूप में मनाई जाती है।

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श्लोक गणेश जी

व्रकतुंड महाकाय, सूर्यकोटी समप्रभाः |
निर्वघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येरुषु सवर्दा ||

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गणेश जी की आरती:

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय…

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय…

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय…

पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय…

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय…

‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥ जय…

दोहा श्री गणेश

श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत् सन्मान॥
सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

स्तुति श्री गणेश जी महाराज

गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विघ्न टरें।
तीन लोक तैंतीस देवता द्वार खड़े सब अर्ज करे ॥

ऋद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विरजे आनन्द सौं चंवर दुरें ।
धूप दीप और लिए आरती भक्त खड़े जयकार करें ॥

गुड़ के मोदक भोग लगत है मूषक वाहन चढ़े सरें ।
सौम्य सेवा गणपति की विघ्न भागजा दूर परें ॥

भादों मास शुक्ल चतुर्थी दोपारा भर पूर परें ।
लियो जन्म गणपति प्रभु ने दुर्गा मन आनन्द भरें ॥

श्री शंकर के आनन्द उपज्यो, नाम सुमरयां सब विघ्न टरें ।
आन विधाता बैठे आसन इन्द्र अप्सरा नृत्य करें ॥

देखि वेद ब्रह्माजी जाको विघ्न विनाशन रूप अनूप करें।
पग खम्बा सा उदर पुष्ट है चन्द्रमा हास्य करें ।
दे श्राप चन्द्र्देव को कलाहीन तत्काल करें ॥

चौदह लोक में फिरें गणपति तीन लोक में राज करें ।
उठ प्रभात जो आरती गावे ताके सिर यश छत्र फिरें ।

गणपति जी की पूजा पहले करनी काम सभी निर्विध्न करें ।
श्री गणपति जी की हाथ जोड़कर स्तुति करें ॥

स्तोत्र > श्री गणेश स्तोत्र > संकटनाशन स्तोत्र – नारद पुराण

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्
भक्तावासं स्मरेनित्यम आयुष्कामार्थ सिध्दये ॥१॥

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्
तृतीयं कृष्णपिङगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥२॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धुम्रवर्णं तथाषष्टम ॥३॥

नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥४॥

द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर:
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिध्दीकर प्रभो ॥५॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम ॥६॥

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षडभिर्मासे फलं लभेत्
संवत्सरेण सिध्दीं च लभते नात्र संशय: ॥७॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥८॥

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