Jagannath Puri Rath Yatra Information in Hindi | श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

Jagannath Puri Rath Yatra Information in Hindi

Puri Jagannath Rath Yatra श्री जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Puri Rath Yatra), भारत का हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार (famous festivals of india) है जो प्रभु जगन्नाथ जी (Lord Jagannath) से जुडा हुआ है ।विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर भारत के पूर्वी तट पर ओडिशा राज्य के पूरी में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण राजा इन्द्रद्युम्न ने करवाया था जो की भारत के मुख्य चार धामों में से भी एक है।

यह रथयात्रा पुरी (Puri – City in Odisha) का प्रधान पर्व भी है।इसमें भाग लेने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश के सुदूर प्रांतों से आते हैं और रथयात्रा को भारत सहित विदेशों में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है ।

Jagannath Rath Yatra in Puri is a popular festival 2018

श्री जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा की कहानी | Jagannath Puri Rath Yatra (14 July 2018) Story In Hindi

हिन्दू धर्म में मान्यता है की व्यक्ति को मरने से पहले चारों धाम (भारतीय धर्मग्रंथों में बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम को प्रमुख  चार धाम के रूप में बताया गया है) की यात्रा करनी चाहिए, इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जगन्नाथ पूरी में भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण का मंदिर है, जो बहुत विशाल और कई सालों पुराना है. इस मंदिर में लाखों भक्त हर साल दर्शन के लिए आते है।

इस जगह का एक मुख्य आकर्षण जगन्नाथ पूरी की रथ यात्रा भी है। यह रथ यात्रा किसी त्यौहार से कम नहीं होती है, इसे पूरी के अलावा देश व विदेश के कई हिस्सों में भी निकाली जाती है. जाने श्री जगन्नाथ पूरी की रथ यात्रा के बारे में विस्तार से

इतिहास

Puri Jagannath Mandir पौराणिक कथाओं के अनुसार ‘राजा इन्द्रद्युम्न’ भगवान जगन्नाथ को ‘शबर राजा’ से यहां लेकर आये थे तथा उन्होंने ही मूल मंदिर का निर्माण कराया था जो बाद में नष्ट हो गया। हालांकि मंदिर के निर्माण हुआ और यह कब नष्ट हुआ इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है। वर्तमान 65 मीटर ऊंचे मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में चोल ‘गंगदेव’ तथा ‘अनंग भीमदेव’ ने कराया था। परंतु जगन्नाथ संप्रदाय वैदिक काल से लेकर अब तक मौजूद है।

क्यों मनाया जाता है ?

यह पर्व भगवान् श्री जगन्नाथ जी के सम्मान में मनाया जाता है । श्री जगन्नाथ जो की भगवान विष्णु के दस अवतारों में से एक अवतार माने जाते  है ।

रथ यात्रा का पर्व कैसे मनाया जाता है ?

इस उत्सव में भगवान जगन्नाथ/श्रीकृष्ण की मूर्ति को लकड़ी के बने एक भव्य और सुसज्जित रथ में रखते हैं । उनके साथ उनके बड़े भाई बलराम और बहिन सुभद्रा की मूर्तियों भी होती हैं । रथ नगर के प्रमुख बाजारों से गुजरता है । रथ में 16 पहिये दिखाये जाते है । यद्यपि रथ को खींचने वाले लकड़ी के घोडे भी रथ मे लगे होते हैं, लेकिन श्रद्धालुजन रस्सी के सहारे इसे खींचना बड़ा पुण्य का काम मानते हैं ।

रथ एक सप्ताह तक गंगा के किनारे (या किसी अन्य नदी के किनारे) खड़ा रहता है । इस बीच श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते रहते है और तरह-तरह का चढ़ावा चढ़ाते है । एक सप्ताह के बाद पुनर्यात्रा शुरू होती है और उसी प्रकार समारोहपूर्वक रथ को मंदिर में लाकर मूर्तियों को वहाँ पुन: प्रतिष्ठित कर दिया जाता है ।

जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा कब निकाली जाती है  ( Jagannath Puri Rath Yatra 2018 Date and Time) :–

भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा हर साल अषाढ़ माह (जुलाई महीने) के शुक्त पक्ष के दुसरे दिन निकाली जाती है. Puri Rath Yatra 2018 Date इस साल ये यात्रा 14 जुलाई 2018, शनिवार को निकाली जाएगी. रथ यात्रा का महोत्सव 10 दिन का होता है, जो शुक्ल पक्ष की ग्यारस के दिन  (23 जुलाई )को इस यात्रा का समापन होगा। यात्रा समापन की रस्म को बहुड़ा यात्रा कहा जाता है।

यात्रा के दौरान पूरी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचते है. इस दिन भगवान कृष्ण, उसके भाई बलराम व बहन सुभद्रा को रथों में बैठाकर गुंडीचा मंदिर ले जाया जाता है. तीनों रथों को भव्य रूप से सजाया जाता है,जगन्नाथ पूरी के रथ का निर्माण अक्षय तृतीया के दिन से शुरू हो जाता है.

रथ का निर्माण  –

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए रथों का निर्माण लकड़ियों से होता है। इसमें कोई भी कील या काँटा, किसी भी धातु का नहीं लगाया जाता। रथों का निर्माण अक्षय तृतीया से ‘वनजगा’ महोत्सव से प्रारम्भ होता है तथा लकड़ियाँ चुनने का कार्य इसके पूर्व बसन्त पंचमी से शुरू हो जाता है।

क्रमांक किसका रथ है रथ का नाम रथ में मौजूद पहिये रथ की ऊंचाई लकड़ी की संख्या
1. जगन्नाथ/श्रीकृष्ण नंदीघोष/गरुड़ध्वज/ कपिलध्वज 16 13.5 मीटर 832
2. बलराम तलध्वज/लंगलाध्वज 14 13.2 मीटर 763
3. सुभद्रा देवदलन/पद्मध्वज 12 12.9 मीटर 593
  • जगन्नाथ(श्रीकृष्ण) का रथ – यह 44.2 फीट ऊँचा होता है, इसमें 16 पहिये होते है, जिसका व्यास 7 फीट का होता है, पुरे रथ को लाल व पीले कपड़े से सजाया जाता है. इस रथ की रक्षा गरुड़ करता है. इस रथ को दारुका चलाता है. रथ में जो झंडा लहराता है, उसे त्रैलोक्यमोहिनी कहते है. इसमें चार घोड़े होते है. इस रथ में वर्षा, गोबर्धन, कृष्णा, नरसिंघा, राम, नारायण, त्रिविक्रम, हनुमान व रूद्र विराजमान रहते है. इसे जिस रस्सी से खींचते है, उसे शंखचुडा नागनी कहते है.
  • बलराम का रथ – यह 43.3 फीट ऊँचा होता है, इसमें 14 पहिये होते है. इसे लाल, नीले, हरे रंग के कपड़े से सजाया जाता है. इसकी रक्षा वासुदेव करते है. इसे मताली नाम का सारथि चलाता है. इसमें गणेश, कार्तिक, सर्वमंगला, प्रलाम्बरी, हटायुध्य, मृत्युंजय, नाताम्वारा, मुक्तेश्वर, शेषदेव विराजमान रहते है. इसमें जो झंडा लहराता है, उसे उनानी कहते है. इसे जिस रस्सी से खींचते है, उसे बासुकी नागा कहते है.
  • सुभद्रा का रथ – इसमें 12 पहिये होते है, जो 42.3 फीट ऊँचा होता है. इसे लाल, काले रंग के कपड़े से सजाया जाता है. इस रथ की रक्षा जयदुर्गा करता है, इसमें सारथि अर्जुन होता है. इसमें नंद्बिक झंडा लहराता है. इसमें चंडी, चामुंडा, उग्रतारा, वनदुर्गा, शुलिदुर्गा, वाराही, श्यामकली, मंगला, विमला विराजमान होती है. इसे जिस रस्सी से खींचते है, उसे स्वर्णचुडा नागनी कहते है.

इन रथों को हजारों लोग मिलकर खींचते है, हर कोई एक बार इस रथ को खीचना चाहते है, क्यूंकि इससे उन्हें लगता है कि उनकी सारी मनोकामना पूरी होती है. यही वो समय होता है जब जगन्नाथ जी को करीब से देखा जा सकता है.

जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा के विषय में रोचक तथ्य Some Interesting Facts about Puri Rath Yatra Festival in Hindi 2018

  1. रथ यात्रा बहुत ही पौराणिक त्यौहार है और इसे भारत के साथ-साथ विश्व के दुसरे देशों में भी मनाया जाता है। प्रमुख रूप से डबलिन, न्यू यॉर्क, टोरंटो और लाओस में यह त्यौहार मनाये जाने में मशहूर है।
  2. पोड पीठा इस त्यौहार का एक मुख्य मिठाई है जो बहुत ही प्रसिद्ध है।
  3. तीनो भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्र को कुल 208 किलो ग्राम सोने से सजाया जाता है।
  4. ब्रिटिश शासन के काल में जगन्नाथ रथ यात्रा के त्यौहार को जुग्गेरनट कहा जाता था इसके बड़े और वजनदार रथों के कारण।
  5. आज तक जितनी बार भी रथ यात्रा मनाया गया है पूरी में हर बार बारिश हुई है।
  6. विश्व भर में जगन्नाथ मंदिर ही ऐसा मंदिर है जहाँ से भगवान् के स्तूप या मूर्ति को मंदिर से बहार निकाला जाता है।
  7. जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर स्थित झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है।
  8. पुरी के महाराजा प्रथम सेवक होने के नाते रथों को सोने की झाड़ू से बुहारते हैं तथा उसके बाद रथों को खींचा जाता है।
  9. हर साल पूरी रथ यात्रा के तीनों रथों को पूरी तरीके से नया बनाया जाता है।

 

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आप सभी को Gyani Dunia की तरफ से RATHA YATRA 2018 की हार्दिक शुभकामनाएं ! Happy Jagannath Ratha Yatra 2018

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