कारगिल विजय दिवस | Kargil Vijay Diwas Poem In Hindi

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कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई

Kargil Vijay Diwas : ये शान से लहरता तिरंगा जब भी हम देखते है हम सोचते है ये हमेशा ऐसे ही लहराता रहे, हमेशा यूँ ही खुले आसमा मे अपना सीना ताने खड़ा रहे और यूँ ही हम्हे गर्वित करता रहे…पर हर एक चीज जो आपको खुशी देती है, कीमत मांगती है और इस तिरंगे की शान ने भी हमसे बहुत बार कीमत मांगी है और हम्हे गर्व होना चाहिए हमारे भारत माता के सपूतो पर जिन्होंने वो कीमत हंसी हंसी चुकाई है…

चाहे वो 1947 हो चाहे वो 1962 चाहे वो 1971 हो और चाहे वो कारगिल, वीर हर दौर मे थे और उन्होंने अपनी वीरता की मिशाल पेश की और ऐसी वैसी मिशाल नहीं ऐसी मिशाल जो जमाना याद करेगा शदियों तक, इतिहास गवाह रहेगा उनकी बलिदानी का और उनके हौंसले का और आखिर उनकी”जीत” का….

Kargil Vijay Diwas Poem
Kargil Vijay Diwas Poem

कारगिल विजय दिवस की सभी देशवासियों को बहुत बहुत बधाईया !

हर एक सैनिक को सलाम जो आज सीमा पर खड़ा है अपने बुलंद होंसलों के साथ एक दिवार बन कर !
हर शहीद को दिल से नमन, मुझे पता है भगवान ने उन्हें जन्नत से भी ऊपर जगह दी होंगी, ये देश और इस देश का हर नागरिक आपका ताउम्र कर्जदार रहेगा !

Kargil Vijay Diwas Poem In Hindi

जरा तुम भी ख्याल कर लो…
कर्ज है जिनका उन्हें याद कर लो…

नमन हर उस माँ को जिसके बेटे घर ना आये…
कैसे उसके घर चूल्हा जला होगा, कैसे निवाला भाये…

वो शेर थे, झपट गये गीदड़ो के टोले पर…
मजाल किसकी जो हाथ डाल थे भारत माँ के चोले पर…

घुटनो पर ला कर छोड़ा दुश्मन को…
चाहे जान खुद की निकल गई…
हैरान रह गए वो भी देख कर…
लाहौर मे राष्ट्रगान की बोली निकल गई…

किससे टकराये हो, ये याद रखना…
शेरों के आगे गीदड़ भभकीया बिखर गई…
ये हिंदुस्तान है, यूँ ही खिलता रहेगा…
ज़माने मे जो भी टकराया उसकी हवा निकल गई…

घुटनो पर ला कर छोड़ा दुश्मन को…
चाहे जान खुद की निकल गई…. जय हिन्द ! जय भारत ! ©suthar_sonu

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