Navratri 2017: 21 सितंबर से हैं नवरात्र, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Maa-durga-devi-navratri-wallpaper-258

नवरात्रि का महत्व:

नवरात्रि हिंदू धर्म का एक पर्व है जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है नवरात्रा की मान्यता है यह है कि मां दुर्गा स्वयं प्रकट होकर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करती है | 2017 के नवरात्रि पर्व की स्थापन 21 सितंबर 2017 से शुरू होकर 29 सितंबर 2017 तक चलेंगे  | नवरात्रि का त्यौहार संपूर्ण भारतवर्ष में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है |

Navratri Wallpaper 2017 HD

नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों – महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

नौ देवियाँ है :-

  • 21 सितंबर को प्रथम दिन शैलपुत्री की पूजा होगी। – इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
  • 22 सितंबर को दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी।- इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
  • 23 सितंबर को तीसरे दिन  चंद्रघंटा की पूजा होगी।- इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।
  • 24 सितंबर को चौथे दिन कूष्माण्डा की पूजा होगी।- इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
  • 25 सितंबर को पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा होगी।- इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
  • 26 सितंबर को छठे दिन कात्यायनी की पूजा होगी। – इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
  • 27 सितंबर को सातवें दिन कालरात्रि की पूजा होगी।- इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
  • 28 सितंबर को आठवें दिन महागौरी की पूजा होगी।- इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।
  • 29 सितंबर को नौवें दिन सिद्धिदात्री  की पूजा होगी।- इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।

Navratri 2017: 21 सितंबर से हैं नवरात्र, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि:

21 सितंबर २०१७ को माता दुर्गा के प्रथम रूप यानी के शैलपुत्री की पूजा से इस पर्व की शुरुवात होती है । 21 सितंबर २०१७ शुरू होने वाले नवरात्रि के पर्व को सुबह 6:03 बजे से 8:22 बजे तक का समय अमृत योग का समय  है। अगर आप घर में कलश स्थापना चाहते हैं तो अमृत योग का समय सबसे उतम समय है इस समय में आप अपने घर में कलश की स्थापना विधि विधान से कर सकते है।

कलश स्थापना:

अपने घर में आप कलश की स्थापना करने के लिए सबसे पहले आप जौ को फर्श पर डालें और उसके बाद में कलश को जोऊ पर स्थापित करें । उसके बाद आप कलश पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं तथा कलश पर मौली बाधकर उसमे पवित्र जल भर दे । कलश में अक्षत(चावल ) , साबुत सुपारी, फूल, पंचरत्न और सिक्का डाल दे ।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *