Paryavaran Pradushan Par Nibandh | Essay on Environmental Pollution in Hindi

नमस्कार दोस्तों Paryavaran Pradushan Par Nibandh परीक्षा में पूछा जाने वाला बहुत ही अच्छा निबंध है ये आपको आसानी से याद भी हो जाता है और परीक्षा में अच्छे अंक वाले में मदद करता है इसलिए इस आर्टिकल में हम आपके लिए पर्यावरण प्रदुषण पर निबंध लेकर आये है जो आपकी पढाई में और परीक्षा में अच्छे अंक वाले में आपके लिए मददगार साबित होगा तो आएये शुरू करते है :-

पर्यावरण किसे कहते है :- Paryavaran Pradushan Par Nibandh के बारे में जानने से पहले हम जानेंगे की पर्यावरण किसे कहते है “हमारे चारों ओर का आवरण जिसमे धरती, आकाश, पानी, जलवायु, पेड़-पोधे, जीव-जंतु आदि आते है ये सभी मिलकर एक आवरण का निर्माण करते है जिसे पर्यावरण कहते है” |

Paryavaran Pradushan Par Nibandh

Paryavaran Pradushan Par Nibandh

पर्यावरण प्रदुषण :- पर्यावरण प्रदुषण दो शब्दों से मिलकर बना है पर्यावरण + प्रदुषण, जिसमे पर्यावरण का अर्थ है “हमारे चारों और का आवरण” और प्रदुषण का अर्थ है “दूषित होना” अर्थात् हमारे चारों ओर का आवरण जिसमे स्थल, वायु, जल आदि आते है उसके भोतिक, रासायनिक और जैविक गुणों में होने वाले अवांछनीय परिवर्तन पर्यावरण प्रदुषण कहते है |

पर्यावरण प्रदुषण के प्रकार :-

पर्यावरण प्रदुषण के कई प्रकार होते हैं जिनमें से हम प्रमुख प्रकारों को देखेंगे

वायु प्रदूषण :- वायु सभी जीवो के जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक है सभी जीव-जंतु बिना खाए कुछ समय तक जीवित रह सकते हैं लेकिन बिना वायु के एक मिनट भी जीवित नहीं रह सकते, लेकिन आजकल शुद्ध वायु मिलना बहुत ही मुश्किल हो गया है कारखानों से निकलने वाले धुएं तथा वाहनों से निकलने वाले धुएं ने हवा में धुलकर इसे दूषित कर दिया है और फैक्ट्रियों से निकलने वाली घातक ग्रीनहाउस गैसों ने हवा में धुलकर इसे प्रदूषित कर दिया है

जल प्रदूषण :- जल मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण है जल के बिना मानव तथा जीव-जंतुओं के जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते है, जल में अपशिष्ट पदार्थों के मिलने से उसकी शुद्धता में जो गिरावट आती है उसे जल प्रदूषण कहते हैं
कारखानों फैक्ट्रियों तथा घरों से निकलने वाला दूषित जल को नदियों तालाबों तथा अन्य जल स्रोतों मैं छोड़ने से जल जल प्रदूषण होता है कारखानों फैक्ट्रियों से निकलने वाला वाले जेल में विभिन्न प्रकार की है हानिकारक तत्व मिले होते हैं जो नदी या अन्य जल स्रोतों के चरण में मिलकर उसे दूषित करते हैं इसी कारण से जो नदियां पहले स्वच्छ थी आज वह दूषित हो चुकी है |

ध्वनि प्रदूषण :- आज के समय में ध्वनि प्रदूषण एक विकट समस्या बन गई है मनुष्य तथा जीव जंतुओं को रहने के लिए शांत वातावरण चाहिए लेकिन आजकल वाहनों कारखाना वाद्य यंत्रों आदि से निकलने वाली तेज आवाज के कारण ध्वनि प्रदूषण हो रहा है इस ध्वनि प्रदूषण के कारण मनुष्य बहरेपन और तनाव का शिकार हो रहा है दोनों प्रदूषण के कारण ही पक्षियों के अंडे समय से पहले हे फूट जाते हैं आज के समय में ध्वनि प्रदूषण एक विकराल रूप ले चुका है |

रेडियोधर्मी प्रदूषण :- वायुमंडल में रेडियोधर्मी पदार्थों की आकस्मिक उपस्थिति हो जाती है इन रेडियोधर्मी पदार्थों की उपस्थिति मनुष्य तथा जीव जंतुओं के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है कई बार ऐसा होता है कि इन रेडियोधर्मी पदार्थों की उपस्थिति वातावरण में इतनी बढ़ जाती है कि जीव जंतुओं की मृत्यु तक हो जाती है |

मृदा प्रदुषण :- मृदा में विभिन्न प्रकार के खनिज लवण, गैसे, कार्बनिक पदार्थ आधी एक निश्चित मात्रा में उपस्थित होते हैं किन्ही कारणों की वजह से इनकी मात्रा और अनुपात में होने अवांछनीय परिवर्तन को मृदा प्रदुषण कहते है
खेतों में होने वाले रासायनिक खाद और किटनाशको के इस्तेमाल से मृदा प्रदुषण होता है, कृषि भूमि पर पशुओं को चराने से भी मृदा प्रदूषण होता है |

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पर्यावरण प्रदुषण के कारण :-

यातायात :- यातायात से निकलने वाला धुआं शुद्ध वायु मैं खुलकर उसे दूषित कर देता है जिसके कारण वायु प्रदूषण होता है |

वनों की कटाई :- वर्तमान समय में जनसंख्या वृद्धि बहुत ही तेजी से हो रही है इस बढ़ती हुई जनसंख्या को बुनियादी सुविधाएं आवास तथा खाना उपलब्ध कराने के लिए वनों की कटाई की जा रही है जिससे पर्यावरण को हानि पहुंचती है और पर्यावरण प्रदूषण हो रहा है |

कृषि अपशिष्ट :- बढ़ती जनसंख्या की खाने की आपूर्ति के लिए खेती में किए जाने वाले कीटनाशकों तथा और उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी गुणवत्ता दिन प्रतिदिन कम होती जाती है इस कारण मृदा प्रदूषण हो रहा है |

जहरीली गैसे :- कारखानों से निकलने वाली हानिकारक गैसे जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि गैसे वायु में घुलकर इसे दूषित कर देती है जिससे वायु प्रदूषण होता है |

उपसंहार :-

वर्तमान समय में बढ़ते हुए इस पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से निदान पाने के लिए हमें सभी को पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागरूक करना होगा तथा पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए जिसमें सामान्य जन को प्रदूषण को रोकने के उपाय तथा विधियां बताई जा सके यदि इस बढ़ते हुए पर्यावरण प्रदूषण को अभी नहीं रोका गया तो आने वाले कुछ वर्षों में यह इतना विकराल रूप ले लेगा की मनुष्य तथा जीव जंतुओ जीवन संकट में पड़ जाएगा |

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